समूचे उ.प्र. में शिक्षामित्रों का आंदोलन तेज, राज्य सरकार से की मांग-उच्चतम न्यायालय में दाखिल करे पुनर्विचार याचिका…

लखनऊ, 26 जुलाई। उच्चतम न्यायालय के आदेश से आहत शिक्षामित्रों ने सरकार से पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की मांग को लेकर आज आन्दोलन शुरू कर दिया।
शिक्षामित्रों की मांग है कि उच्चतम न्यायालय में याचिका राज्य सरकार ने दाखिल की थी इसलिए पुनर्विचार याचिका भी उसे ही दाखिल करना चाहिए। इस मांग को लेकर फतेहपुर, सन्तकबीरनगर, बिजनौर, बाराबंकी, अम्बेडकरनगर, गाजीपुर, लखनऊ, बरेली, फर्रुखाबाद और गोरखपुर समेत कई जिलों में शिक्षामित्र आन्दोलित हैं। उन्होंने फर्रुखाबाद में रेलवे स्टेशन पर धरना दिया तो बाराबंकी में लखनऊ-गोरखपुर राजमार्ग जाम कर दिया। सन्तकबीरनगर में आगजनी की सूचना है। आन्दोलन बस्ती में भी चल रहा है। शिक्षामित्रों का कहना है कि राज्य विधानसभा के पिछले चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी आश्वासन दिया था कि शिक्षामित्रों को बेरोजगार नहीं होने देंगे। न्यायालय के कल के आदेश से शिक्षामित्रों का भविष्य अधर में लटक जायेगा। श्री मोदी को अपना वायदा निभाते हुए लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पेश करना चाहिए ताकि शिक्षामित्र सहायक अध्यापक बने रहें। शिक्षामित्र एसोसिएशन के सचिव और लखनऊ इकाई के अध्यक्ष सुशील यादव ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने लगभग तीन लाख लोगों के बारे में आदेश दिया है जिसमें 72825 बीएड और टीईटी पास अभ्यर्थी हैं जबकि 172000 शिक्षामित्र। इनके अलावा 99000 बीटीसी और टीईटी पास अभ्यर्थी हैं जबकि 172000 शिक्षामित्र टीईटी उत्तीर्ण नहीं हैं। श्री यादव ने कहा कि न्यायालय के कल का आदेश दो तरह का है। एक में बीएड और टीईटी पास 72000 अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर है जिसमें टीईटी मेरिट को ही नियुक्ति का आधार मान लिया गया है। उनका दावा है कि इन नियुक्तियों में काफी घपला हुआ था।
इसी मामले में तत्कालीन शिक्षा निदेशक संजय मोहन अभी भी जेल में हैं।
उनका कहना है कि 99000 अभ्यर्थियों की नियुक्ति राज्य सरकार ने एकेडेमिक मेरिट पर की थी। इस नियुक्ति को भी न्यायालय ने उचित ठहराया था लेकिन 2001 से पढ़ा रहे शिक्षामित्रों को न्यायालय ने टीईटी पास करना अनिवार्य बता दिया। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने 23 अगस्त 2009 को आदेश दिया था कि बगैर टीईटी के शिक्षक की नियुक्ति न की जाये। राज्य सरकार ने इसे एक अप्रैल 2010 से लागू किया।
उन्होंने कहा कि ज्यादातर शिक्षामित्र 2001 से पढ़ा रहे हैं तो उन्हें नियमित करने की बजाय बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। टीईटी का आदेश लागू होने के पहले से पढ़ा रहे शिक्षामित्रों को नियमित किया ही जाना चाहिए। राज्य सरकार ने भी इसी को आधार मानकर शिक्षामित्रों का समायोजन कराया था। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यदि पुनर्विचार याचिका नहीं दाखिल करेगी तो उनका एसोसिएशन इसके लिए आगे आयेगा।

 

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