2019 में मोदी का मुकाबला करने की क्षमता किसी में नहीं-नीतीश

पटना, 31 जुलाई। भारतीय जनता पार्टी(भाजपा)की ओर से पिछले लोकसभा चुनाव में श्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किये जाने के मुद्दे पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(राजग)से 17 साल का नाता तोड़ लेने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज कहा कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में श्री मोदी का मुकाबला करने की क्षमता किसी में नहीं है। श्री कुमार ने करीब 20 माह तक राष्ट्रीय जनता दल(राजद), कांग्रेस और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की महागठबंधन सरकार चलाने के बाद उससे नाता तोड़ फिर राजग के सहयोग से बिहार में सरकार बनाने के बाद पहली बार यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में श्री मोदी का मुकाबला करने की क्षमता किसी में नहीं है। मुख्यमंत्री से जब यह पूछा गया कि क्या वह श्री मोदी को अपना नेता मानते हैं तो उन्होंने सवाल का जवाब नहीं दिया। हालांकि बाद में जब उनसे पूछा गया कि क्या वह 2019 में श्री नरेंद्र मोदी को दुबारा प्रधानमंत्री बनाने में सहयोग देंगे तब उन्होंने कहा कि श्री मोदी का मुकाबला करने की क्षमता किसी में नहीं है और दुबारा देश के प्रधानमंत्री वही बनेंगे। वर्ष 2013 में राजग से अलग होने के बाद ‘मिट्टी में मिल जायेंगे लेकिन भाजपा के साथ कभी नहीं जाएंगेÓ के बयान के संबंध में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने जिस समय यह बात कही थी उस समय उसका संदर्भ अलग था और आज की परिस्थिति अलग है। उन्होंने कहा कि पूर्व में दिये गये बयान को लेकर उनका मजाक उड़ाया जा सकता है लेकिन उन्होंने बिहार के हित में भाजपा के साथ सरकार बनाने का निर्णय लिया है। उनके लिए बिहार का हित सर्वोपरि है।
श्री कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और नोटबंदी लागू करने के साथ ही सर्जिकल स्ट्राइक की सराहना करते हुये कहा कि उन्होंने आर्थिक विकास को गति देने के लिए जीएसटी लागू किया है। इससे जहां कर प्रणाली में पारदर्शिता आएगी वहीं भ्रष्टाचार में लिप्त कारोबारियों पर लगाम भी लगेगी। उन्होंने कहा कि नोटबंदी से भी कालाधन छुपाने वालों के खिलाफ कार्रवाई हुई है। यह प्रधानमंत्री का राष्ट्रहित में किया गया सराहनीय प्रयास है, जिसका उन्होंने भी समर्थन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नोटबंदी के बाद उन्होंने बेनामी संपत्ति के खिलाफ भी कार्रवाई करने के लिए कहा था। इसके बाद प्रधानमंत्री ने बेनामी संपत्ति पर कार्रवाई करना शुरू करवा दिया। उन्होंने जनता के हित में नोटबंदी का समर्थन किया था और राष्ट्रहित में सर्जिकल स्ट्राइक के मामले पर केंद्र सरकार को समर्थन दिया था। श्री कुमार ने केंद्र की राजनति में उनकी भूमिका के बारे में पूछे जाने पर कहा मैं बिहार जैसे बड़े राज्य की सेवा कर रहा हूं जो राष्ट्रधर्म ही है। यदि मेरे कार्यों से राज्य का विकास होता है तो इससे देश भी आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि बिहार में उनके अच्छे कार्यों की चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर भी होती है और इसी से उनकी राष्ट्रीय पहचान भी बनी है। उन्होंने अपने ही अंदाज में कहा कि वह केंद्र में कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रहने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर लंबे अर्से तक सेवा कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने राजग में शामिल होने पर धर्मनिरपेक्षता को लेकर विपक्षी पार्टियों की ओर से उठाये जो रहे सवालों का जवाब देते हुये कहा कि धर्मनिरपेक्षता एक विचार है और इसके लिए उन्हें किसी से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके सामने दो ही रास्ते थे कि या तो वह महागठबंधन में रहकर भ्रष्टाचार का समर्थन करते या राजग में आने के बाद धर्मनिरपेक्षता को लेकर आलोचना झेलते। उन्होंने कहा हम अपने काम से साबित कर देंगे कि इस मुद्दे पर होने वाली आलोचना का कोई आधार नहीं है।

श्री कुमार ने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव पर निशाना साधते हुये सवालिया लहजे में कहा कि क्या धर्मनिरपेक्षता का अर्थ केवल यह रह गया है कि इसकी चादर ओढ़कर लोग संपत्ति अर्जित करते रहें। उन्होंने कहा कि अब तो यह तय करना होगा कि धर्मनिरपेक्षता केवल वोट के लिए है या सेवा के लिए। उन्होंने कहा कि उन्हें धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र, समावेशी विकास और न्याय के साथ विकास के सिद्धांत में पूरा यकीन है और वह आगे भी इन मूल्यों की रक्षा के लिए काम करते रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पूर्व राजग के साथ सरकार में रहकर उन्होंने अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए काफी काम किया है और ऐसा इससे पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि राजग से बाहर निकलने के बाद भी वह इस समुदाय के कल्याण के लिए काम करते रहे। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने ही भागलपुर दंगे की अंतिम रिपोर्ट आने के बावजूद इसकी दुबारा से जांच करवाकर पीडि़तों को न्याय दिलवाया। उन्होंने कहा कि वह हमेशा सांप्रदायिक सद्भाव कायम रखने के लिए काम करते रहे हैं इसलिए धर्मनिरपेक्षता पर उन्हें किसी के प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है।

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