आगरा, कानपुर और मेरठ में दौड़ेगी मेट्रो

लखनऊ, 17 जनवरी। उत्तर प्रदेश के तीन महानगरों आगरा, कानपुर और मेरठ में करीब 45 हजार करोड़ रुपये की लागत से मेट्रो ट्रेन दौड़ेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंत्रिमण्डल की आज यहां हुई बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गयी। राज्य सरकार के प्रवक्ता और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने मंत्रिमण्डल की बैठक में लिये गये फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि तीनों महानगरों में मेट्रो का काम सन् 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। श्री सिंह ने बताया कि आगरा में दो कॉरिडोर में इसका निर्माण किया जायेगा। तीस किलोमीटर की दूरी में तीस स्टेशन बनाये जायेंगे। मेरठ में मेट्रो रेल सेवा पर 13 हजार करोड़ रुपये व्यय होने का अनुमान है। इसपर टैक्स अलग से लगेगा। कानपुर में यह योजना 17 हजार करोड़ रुपये में पूरी की जायेगी। योजना की कुल लागत में टैक्स नहीं जोड़ा गया है। कानपुर में योजना के डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट(डीपीआर) को संशोधित किया गया है। दो कॉरिडोर में योजना बनेगी। तीस किलोमीटर की दूरी में 31 स्टेशन बनाये जायेंगे। मेरठ में भी योजना दो कॉरिडोर में बनेगी। तैंतीस किलोमीटर की योजना में 29 स्टेशन बनाये जायेंगे। मेरठ में इस पर 13800 करोड़ रुपये व्यय होने का अनुमान है। इस पर टैक्स अलग से लगेगा। एक अन्य फैसले में सरकार ने बागपत जिले की सहकारी चीनी मिल रमाला की पेराई क्षमता बढ़ाकर लगभग दो गुनी करने का निर्णय लिया है।
राज्य सरकार के प्रवक्ता और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने आज बताया कि अभी तक उसकी पेराई क्षमता 2750 टीसीडीएल थी, अब इसे बढ़ाकर पांच हजार करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही चीनी मिल परिसर में 27 मेगावाट की क्षमता वाले विद्युत परियोजना की स्थापना का भी निर्णय लिया गया है। इन परियोजनाओं पर आने वाली लागत का आधा हिस्सा राज्य सरकार देगी जबकि आधे की व्यवस्था मिल को करनी होगी। इससे 34 हजार गन्ना किसानों को लाभ मिलेगा। सात हजार लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। योजना एक साल में पूरी होगी। इसपर 30225़ 53 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।
श्री सिंह ने बताया कि इसके साथ ही मंत्रिमण्डल ने संयुक्त प्रान्त आबकारी अधिनियम-1910 को संशोधित करते हुए राज्य के कुल 385 मॉडल शॉप परिसर में ही मदिरा के सेवन को अनिवार्य कर दिया गया है। इस सम्बंध में उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के भी निर्देश थे।
उन्होंने बताया कि ओबरा तापीय योजना के एक ब्वायलर को लगे 36 वर्ष पूरे हो गये हैं जबकि उसे 25 साल में ही बदल दिया जाना चाहिए। सेन्ट्रल पॉवर अथारिटी ने उसे तत्काल बन्द करने के निर्देश दिये हैं। उस निर्देश के मुताबिक 130 करोड़ रुपये की लागत में भेल को बनाने के लिए कह दिया गया है। तेरह करोड़ रुये अग्रिम भुगतान करने का निर्णय लिया गया है। इसके बदलने के दौरान विद्युत उत्पादन में कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
इसके साथ ही मंत्रिमण्डल ने राज्य राजपथों को राष्ट्रीय राजमार्ग में परिवर्तित करने वाले नियमों को सरल करने का निर्णय लिया गया है।

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